... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

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माता की कृपा

मां दुर्गा के चरणों में मैं, अपना शीश झुकाता हूँ ।

तेरे दर पे आकर माता, श्रद्धा के फूल चढाता हूँ ।

कोई न हो जग में दुखी मां , तेरी कृपा बनी रहे ।

बस इसी आशा से मैं, लोगों को भजन सुनता हूँ ।

 

जिस पर तेरी कृपा पड़े मां , भाग्य बदल जाता है ।

पल भर में ही वह मानव , रंक से राजा बन जाता है ।

जहां जहां तक नजरें जाती , सब पर तेरी माया है ।

 

प्रकृति का कण कण भी, तुझ पर ही बलि जाता है ।

 

तेरे दर पे आकर माता, मन का बगिया खिलता है ।

भूल जाता हूँ दुनियादारी, सुकून मन को मिलता है ।

तेरी याद में हर दिन माता, मैं ये भजन लिखता हूँ ।

तेरी कृपा के बिना तो माँ,  पत्ता भी न हिलता है ।

 

महेन्द्र देवांगन "माटी"

 

  पंडरिया 

(छत्तीसगढ़ )

मो नं -- 8602407353 

Email - mahendradewanganmati@gmail.com

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