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सच और झूंठ बताती आँखें |
शर्म - हया दिखाती आँखें ||

 

मर जाये आँख का पानी,
कठोर हृदय की पहचान कराती आँखें ||

 

प्यार - मुहब्बत की पहली सीढ़ी,
शुरूआत कराती आँखें ||

 

घड़ियाली आंसुओं से
बहुत दुःखी हो जाती आँखें ||

 

हृदय की तड़प से निकले आंसू,
अमृत बना देती आँखें ||

 

बड़ी मासूम होती आँखें |
सच और झूंठ बताती आँखें ||

mukesh123idea@gmail.com
 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
गॉव रिहावली, डाक तारौली गुर्जर, तहसील फतेहाबाद, आगरा, 283111

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