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पूजा पाण्डेय की रचनाएं

आखिर क्यों

आखिर क्यों मैं उसे पा नहीं सकती,
और क्यों ये बता नहीं सकती...
कि वो है मेरी धड़कन या मेरे मन का दर्पण,
फिर क्यों इस मन के दर्पण में उसकी तस्वीर बना नहीं सकती...
अगर बन जाए प्रतिबिम्ब उसका,
 तो क्यों ये दर्पण उसे दिखा नहीं सकती....

 

अनजान हूँ इस सफ़र में,
और वो है जानी पहचानी डगर तो क्यों उसे अपनी राह बना नहीं सकती..
दे अगर वो साथ मेरा,
तो क्यों उसे इस राह पर अपने साथ चला नहीं सकती.....

 

चाहत है वो मेरी,
तो क्यों उसे अपना जुनून बना नहीं सकती,
जगमगाता चाँद है वो मेरा,
 तो क्यों उसे अपने भोंर का ख्वाब बना नहीं सकती,
 आता है रोज़ वो मेरी सपनों  की दुनिया में,
तो क्यों उसे अपनी दुनिया बना नहीं सकती..

 

ये मन का दर्पण,
अनजानी फिर भी पहचानी राह का सफ़र,
अपनी चाहत और अपने हसीन सपनों की दुनिया,
ये कुल बातें शायद कभी उसे बता नहीं सकती..

करीब है वो मेरे इतने,
कहीं सब जानकर चला न जाए, मुझसे वो दूर
इस डर से उसे अपने दिल का हाल सुना नहीं सकती....

 

और बिना बताए,
मैं उसे आखिर तक पा नहीं सकती...||

 

 

 

प्रेम अनुशंसा

 

तुम दूर होकर भी पास हो,
हर पल न होकर भी होने का आभास होे....

सुबह-शाम दिन-रात अब ख्याल तुम्हारा ही,
इस छाये हुए प्रेम का तुम ही तो अंदाज हो....
मेरे पुलकित ह्दय में प्रेम प्रतिग्या की,
तुम ही आवाज़ हो....

इस उत्साह भरे जीवन का अब तुम ही,
क्रिया-कलाप हो....
हाँ हूँ मैं इतनी मग्न इस रोग में,
कि अब तुम ही मेरा जश्न और विलाप हो....

तुमसे जुड़कर दुनिया की मुझको फिक्र नहीं,
क्योकिं अब तुम ही मेरा पूर्ण समाज हो....||

-:हर पल मे बीते कल:-

काश ये ज़मी आसमां हमारे यार न होते,

तो हम इस कदर बेकार न होते...

बचपन मे मां ने हाथ पकड़कर चलना न सिखाया होता,
तो आज दुनिया की भीड मे दौडने को तैयार न होते....

अगर दी न होती हर डांट से कोई न कोई सीख,
तो आज इस कदर समझदार न होते...

समझ जाते समय की अहमियत को तब,
तो आज हमारे पल यूँ
बर्बाद न होते....

फर्क समझा होता अच्छाई और बुराई का,
तो आज सुनानेे को हमारे किस्से बेकार न होते....

अगर की होती मेहनत अपनी इच्छाओ पर,
तो आज हमारे हौसलें पैरो की बेेडियो वाले हार न होत....

थे जो सपनो के आकाश उनकी आँखो में,
काश वजह से हमारी बिखर कर खाक न होते....

महसूस की होती अगर वास्तविकता की गहराई,
तो काल्पनिक हमारे विचार न होते.....

सोचा होता कुछ सफ़र मे चलने से पहले,
तो आज हम डूबती नाव मे सवार न होते....

अगर होती काबिलियत जिम्मेदारी की,
तो यूँ दोस्तो मे दिलदार न होते...

अगर फैसले किए होते दिल से,
तो आज इस दिमाग से बीमार न होते....

माँ पापा की सोच मे है कुछ तो नायाब,
कोशिश की होती जानने की उन्हें,
तो आज क्यों..? उदार न होते....

उम्मीदो के लिए अगर हम होते वफादार,
तो क्यो...? आज कामयाब न होते.....

काश ये ज़मी आसमां हमारे यार न होते,
तो हम इस कदर बेकार न होते........

मज़हब

न हिन्दु बनें, न मुसलमान बनें,
अगर बनना है तो मिलकर दिल से इंसान बनें...

यहाँ जंग छिडी है राम अल्लाह के नाम पर,
और युध्दो के मचान बनें....

जब नाम से उनके जा रही जान, तो फिर कैसे वो भगवान बनें...

पुरानी रीति के कुछ गलत इतिहासो से ही,
कई शमशान बनें...

और इन रंगो की पताका फहराने के फेर मे,
ये शमशान आज का अंजाम बनें....

जो होता था कभी सोने की चिड़िया,
और जहाँ हिन्द की हिन्दी ज़ुबा की कमान बनें.....

उन्नति की आतिशबाजी कुछ ऐसी हो,
जिससे वतन में कई कलाम बनें...

हर जशन के जाम और शहीदो के गम की स्याही से,
आओ आर्यवत् की पहचान बनें...
न कि केवल भाषणों का गुनगान बनें....

ऊपरी चकाचौंध मे मस्त होकर,
केवल अपनी उलझनों मे व्यस्त होकर,
सबसे अनजान बनें...
ऐसे तो हम बेईमान बनें....

यहाँ शेरदिल तो हैं सभी,
हम सिर्फ अपना ईमान बनें...

अगर बन न पाए...
आन बान और शान तो
अपितु केवल इंसान बनें...

न हिन्दु बनें, न मुसलमान बनें,
बनना है तो सिर्फ इन्सान बनें ||

परिचय

 

 

नाम - पूजा पाण्डेय

पिता का नाम - श्री रामचंद्र पाण्डेय

माता का नाम - श्री मती कान्ति पाण्डेय

जन्म - भोपाल

शिक्षा 12th - गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन स्नातक - गणित, भौतिक शास्त्र व भू-विज्ञान स्नातकोत्तर - मनोविज्ञान (अध्ययनरत - अंतिम वर्ष ) हिन्दी मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा बचपन से ही साहित्य में मेरी रुचि रही। अपने मन की बात अपनी कविताओं के रूप में व्यक्त करना मुझे पसन्द है। तथा अपनी रचनाओं के जरिये लोगों तक अपनी बात पहुँचाकर मुझे अत्यंत ख़ुशी का अनुभव होता है। सर्वप्रथम मैंने अपनी कविता म.प्र. ग्रन्थ अकादमी में प्रस्तुत की। तत्पश्चात मैंने कई कविताओं की रचना की और मुझे विभिन्न कार्यक्रमों के अवसर पर अपनी प्रतिभा को प्रस्तुत करने का मौका मिला। वर्तमान में पत्रकारिता से सम्बंधित क्षेत्र में कार्यरत हूँ। जब भी लोगों सराहना मिलती है तो लगता है मेरे कार्य सफल हो गया। सदैव मेरा यह प्रयास रहता है कि में अपनी कविताओं एवं रचनाओं के माध्यम से कोई महत्वपूर्ण एवं मानवीय सन्देश दे सकूँ।
Contact  - pooojapandey93@gmail.com

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