"आत्म मुग्ध होना छोड़कर आलोचकों का आश्रय लें साहित्यकार..."

 

  • ताज नगरी में हुआ विश्व मैत्री मंच भोपाल का सातवां राष्ट्रीय हिंदी साहित्य सम्मेलन 

  • देश भर से जुटे 75 कवि साहित्यकार, विमर्श के केंद्र में रही लघुकथा

 

 

 

विश्व मैत्री मंच भोपाल द्वारा  वैभव पैलेस ऑडिटोरियम आगरा में 7 वां राष्ट्रीय हिंदी साहित्य सम्मेलन आयोजित किया गया. देश भर से 75 साहित्यकारों ने सहभागिता की. इस मौके पर मुख्य अतिथि डॉ ओंकार नाथ द्विवेदी ने कहा कि साहित्यिक विधाएं बदलते दौर में महत्तम से लघुत्तम हो रही हैं. अब साहित्यकार बिंदु में ही सिंधु के दर्शन करना चाहता है. बिना साहित्यिक प्रतिभा के लोग ठेल ठाल के आगे बढ़ रहे हैं. गंभीर साहित्य साधकों को स्थान नहीं मिल पा रहा. ऐसे में जरूरी है कि साहित्यकार आत्म  मुग्ध होना छोड़कर आलोचकों का आश्रय लें, ताकि सृजन का श्रेष्ठ तत्व सामने आ सके. 

अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ लेखक एवं परिकल्पना के संपादक रविंद्र प्रभात ने कहा कि बोलना, सुनना, स्पर्श करना, महसूस करना, रोना, हंसना और प्यार करना जीवन के सात आश्चर्य हैं, इन सातों को आत्मसात कर के ही बेहतर साहित्यकार बनता है. 

स्वतंत्रता सेनानी रानी सरोज गौरिहार ने साहित्य के उत्सवों के यूं ही गतिमान बने रहने का आशीर्वाद दिया.

  विश्व मैत्री मंच की संस्थापक श्रीमती संतोष श्रीवास्तव ने स्वागत उद्बोधन में अतिथियों की प्रतिभागिता के लिए धन्यवाद देते हुए मनीषी साहित्य सम्मान से सम्मानित करते हुए  मोतियों की माला एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान किया ।

वरिष्ठ लेखिका एवं सुवर्णा की संपादक डॉ सुषमा सिंह ने संस्था के विगत वर्षों के कार्यो पर प्रकाश डाला।. विशिष्ट अतिथि उर्वशी के संपादक डॉ राजेश श्रीवास्तव ने रामायण के विभिन्न पहलुओं का शोध परक विवेचन किया।

इन्हें मिला सम्मान..

इलाहाबाद की श्रीमती सरस दरबारी को राधा अवधेश स्मृति पांडुलिपि सम्मान, लखनऊ की डॉ मिथिलेश दीक्षित को हेमंत स्मृति विशिष्ट हिंदी सेवी सम्मान व आगरा की पूजा आहूजा कालरा को द्वारिका प्रसाद सक्सेना स्मृति साहित्य गरिमा सम्मान प्रदान किया गया

विमर्श में छाई लघु कथा..

सम्मेलन के द्वितीय सत्र में लघु कथा की संवेदना और शिल्प विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई. इसकी अध्यक्षता करते हुए डॉ मिथिलेश दीक्षित ने कहा कि लघुकथा के सृजन में अब कोरी कल्पना का अंधेरा छंट चुका है. लघु कथाकार समय गत परिवेश को अपने भीतर जीता है और महसूस करता है.

जिस मुकाम तक मानव समाज आज पहुंचा है, उसमें साहित्यकार की भूमिका निर्णायक रही। जया केतकी,निवेदिता शर्मा,नीरज शर्मा, सत्या सिंह,सविता चड्ढा तथा सीमा सिंह ने महत्वपूर्ण वक्तव्य दिये।जाने माने 15 लघुकथाकारों की लघुकथाओं की प्रस्तुति तथा महिमा वर्मा द्वारा सभी लघुकथाओं की समीक्षा की गई।  

सम्मेलन में डॉ रेखा कक्कड़ व पूनम भार्गव जाकिर द्वारा बनाए गए आकर्षक चित्रों की प्रदर्शनी ने सबका मन मोह लिया. प्रदर्शनी का उद्घाटन  रानी सरोज गौरिहार ने किया. 

अंतिम सत्र में रंगकर्मी अनुपमा यादव की मीरा बाई पर एकल प्रस्तुति ने साहित्य और कला का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।

Share on Facebook
Share on Twitter
Please reload

eKalpana literary magazine

​​Contact & Social Media -

ekalpanasubmit@gmail.com

सभी रचनाएं
ekalpanasubmit@gmail.com पर भेजें
Please reload

Please reload

 

... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

ई-मेल में सूचनाएं, पत्रिका व कहानी पाने के लिये सब्स्क्राइब करें (यह निःशुल्क है)