... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

ई-मेल में सूचनाएं, पत्रिका व कहानी पाने के लिये सब्स्क्राइब करें (यह निःशुल्क है)

प्रेम पर पंकज त्रिवेदी की कविता

पूर्ण प्रेम होता है

संवेदना होती है

तब प्रभाव नहीं होता

 

जब प्रभाव होता है

संवेदना नहीं और

प्रेम भी नहीं होता

 

रिश्तों की पूर्णता

केवल प्रेम में है और प्रेम

शरीरी से अशरीरी तक !

 

कोई कितना भी नकारें

तत्त्वज्ञान की पोथी पढ़ें

प्रेम केवल प्रेम है

 

वहीं से अध्यात्म उठा लें

तब केवल प्रेम से चरम तक

परम प्रेम में लीन होना

*

पंकज त्रिवेदी

संपर्क-   पंकज त्रिवेदी   

"ॐ",  गोकुलपार्क सोसायटी, 80 फ़ीट रोड, सुरेन्द्र नगर, गुजरात - 363002
मोबाईल :  096625-14007              vishwagatha@gmail.com

Share on Facebook
Share on Twitter
Please reload

eKalpana literary magazine

​​Contact & Social Media -

ekalpanasubmit@gmail.com

सभी रचनाएं
ekalpanasubmit@gmail.com पर भेजें
Please reload

Please reload