सुहाग की चूड़ी

मंगलू शाम को जब अपने झोपड़ीनुमा घर पर लौटा तो सामने रखे डिब्बे के ऊपर रखी एक चूड़ी देख चौक गया तुरंत ही आवेश पूर्ण शब्दों मे चीखा-

'बुधरी! ये चूड़ी कहाँ से आयी?'

बुधरी ने सहमी आवाज मे जवाब दिया -

' मैने इसे खरीदी है.'

' कितने रूपये में?'

' पचास रूपये में.'

पचास रुपये का नाम सुनते ही मंगलू का पारा साँतवें आसमान पर चढ़ गया -

' मैं तुझे समझदार समझता था, इतनी गंवार और लोगों के  बहकावे में आने वाली निकलेगी ये मैंने सपने में भी नहीं सोचा था. जाओ उस रुकमणी को चूड़ी इसी वक्त वापिस कर आओ.'

'तुम्हें कैसे पता कि यह चूड़ी मैंने रुकमणी से ही खरीदी है?'

'आज सेठानी जी को कहते सुना कि उसने 500 ₹ में रुकमणी से एक सुहाग की चूड़ी खरीदी है. ये तुम औरतों का अंधविश्वास है और कुछ भी नहीं, ठगने के लिए आजकल लोग क्या नहीं करते हैं!'

इस पर बुधरी के जवाब से मंगलू एकदम शांत हो रुकमणी की प्रशंसा करने लगा -

' अजी! मैने ये पचास रूपये अपने निजी खर्चे के लिए जोड़े थे लेकिन जब सुना कि रुकमणी सुहाग की चूड़ी एक-एक  सभी को दे रही है, जिसकी जितनी इच्छा हो उतने ही रूपये दे. ये साधारण चूड़ी नहीं है, समझे, ये पिछले वर्ष ब्याह कर आई उस रज्जो की है जिसका पति सीमा पर देश की रक्षा करते हुए शहीद हो अमर हो गया. वह तो सारी चूडिय़ां नदी में विसर्जित करने जा रही थी तभी रुकमणी ने देख लिया और उससे चूड़ियां ले लीं और चौराहे पर एक टोकनी रख बेचना प्रारम्भ कर दिया. हाथों-हाथ सारी चूड़ियां बिक गई और बदले में आये सारे रूपये रज्जो को दे दिये.'

 

 

नाम- मीरा जैन. 

जन्मस्थल- जगदलपुर. छ.ग.

जन्म तारीख- 2. नवंबर

शिक्षा- स्नातक

पिछले पच्चीस वर्षों मे

 राष्ट्र स्तरीय की पत्र पत्रिकाओं मे लगभग एक हजार रचनाओं  का प्रकाशन - 

कादंबिनी . हंस. नया ज्ञानोदय. गृह शोभा. सरिता. मेरी सहेली. सरस सलिल. नवनीत.  गृह लक्ष्मी. अहा जिंदगी. मनोरमा.नव भारत. वनिता . माधुरी. द्वीप लहरी. साहित्य अमृत. कथादेश. मिन्नी. साहित्य गुंजन. भारत दर्शन ( न्यूजीलैंड ) . संगिनी

सेतु ( कैलिफोर्निया ) नई दुनिया. दैनिक भास्कर. लोकमत. पत्रिका. अमर उजाला. हरिभूमि. प्रभात खबर. बाल भारती. विश्व गाथा. समाज्ञा . अपना बचपन. शाश्वत सृजन. मंगलयात्रा. वेद अमृत. मानस वंदन. सांझी सोच. देवपुत्र. बाल किलकारी. साहित्यसमीर.नंदन .साक्षा. अक्षरा. शब्द प्रवाह. कंचन केसरी. ज्ञान सबेरा. दैनिक अग्नि पथ. अक्षर विश्व. साक्षात्कार.  दैनिक अवंतिका आदि

अनेक लघुकथा  संग्रहो मे भी प्रकाशित. आकाशवाणी

 इंदौर . जगदलपुर तथा बोल हरियाणा.  बोल  रेडियो तथा म. प्र. दूरदर्शन से प्रसारण. लघुकथाओं का कई भाषाओं मे अनुवादअब तक आठ किताबों का प्रकाशन. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय व छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किताबों का क्रय

अनेक स्थानीय. राज्य. राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय पुरस्कार तथा सम्मान.

2014 मे नई दुनिया तथा टाटा शक्ति प्राइड स्टोरी सम्मान से सम्मानित व पुरस्कृत

वर्ष 2019 मे भारत सरकार ने विद्वानों की सूची मे शामिल किया. पुस्तक सम्यक लघुकथाएं राष्ट्रीय स्तर पर शब्द गुंजन सम्मान से अलंकृत .

 लघुकथा संग्रह 

" मीरा जैन की सौ लघुकथाएं" 

पर विक्रम वि.वि.उज्जैन द्वारा

2011 मे शोध कार्य .दूसरे लघुकथा संग्रह को राष्ट्रीय स्तर पर शब्द प्रवाह द्वारा प्रथम पुरुस्कार.

अनेक लघुकथाएं राज्य व राष्ट्र स्तर पर पुरस्कृत

अब तक चार  लघुकथा संग्रह प्रकाशित हो चुके है

1.मीरा जैन की सौ लघुकथाएं

( इस किताब पर शोध कार्य चार संस्करण आ चुके हैं )

2. 101 लघुकथाएं. 

( पत्रिका प्रकाशन से प्रकाशित तीन संस्करहथण आ चुके है )

3 . सम्यक लघुकथाएं

( बोधी प्रकाशन  )

4. मानव मीत लघुकथाएं

5. कविताएं मीरा जैन की

6.दीन बनाता है दिखावा. लेख संग्रह

7. श्रेष्ठ जीवन की संजीवनी. लेख संग्रह

8. हेल्थ हदसा . व्यंग्य संग्रह

मो.नं. 09425918116

Email - jainmeera02@gmail. com

रचना अप्रकाशित अप्रसारित व मौलिक ही भेजी गई थी.

मीरा जैन

516,साँईनाथ कालोनी . सेठी नगर। 

उज्जैन .

फोन .09425918116

 

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