... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

 

 

पसीना झर रहा झरने की तरह 

जिस्म तर, कपड़े हैं तर 

दिन को मक्खियां 

और रात को मच्छर 

कैसे सहें इस उमस का कहर ?

 

अमीरों ने लगाईं एसियां घरों में 

लेते मजे गर्मी में सर्दी का 

पूछो रामू से, श्यामू से 

कैसे गुजरती हैं रातें उमस भरीं ?

 

खड़ा था धनुआ मालिक के पास 

आ रही थी जिस्म के मैल की बू 

मालिक गुर्राया, दूर खड़े होने का आदेश सुनाया 

धनुआ दोनों हाथ जोड़ गिड़गिड़ाया |

 

ये उमस भरे दिन 

गरीबों के लिए बड़ी आफत भरे दिन होते हैं 

न दिन को सुकून, न रात को चैन 

रोज जीते हैं और रोज मरते हैं 

डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया से लड़ते हैं |

 

- मुकेश कुमार ऋषि वर्मा 

ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर, 

फतेहाबाद, आगरा, 283111

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