... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

हिंदी हिंद की शान है

 

 

हिंदी हिंद की शान है, 

भारतदेश की पहचान है |

शुद्ध-सरल प्रगति की भाषा -

हिंदी हिंद की जान है ||

 

आओ साथी सपने सजायें, 

हिंदी को एक नई पहचान दिलायें |

हृदयों के सारे भेद मिटाकर -

हम सब हिंदीमय हो जायें ||

 

हिंदी की व्यथा सुनो सब जन, 

क्यों भेद बनाये हैं मन-मन ?

सब भेद मिटाकर कदम बढ़ायें साथ-साथ, 

विश्व में हमें तभी मिलेगा मान-सम्मान ||

 

हिंदी का वैभव अमर है, 

हिंदी से ही छू सकेंगे शिखर है |

आओ सभी साथी माँ भारती के आँचल तले -

अपनी एकता से ही क्षण-क्षण त्यौहार है ||

 

- मुकेश कुमार ऋषि वर्मा 

ग्राम रिहावली, डाक तारौली, 

फतेहाबाद, आगरा, 283111,उ.प्र.

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