... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

संसार (हाइकू)

 

 

 

 

नशा जो किया 

फिरे भीख मांगता

घर बर्वाद |

 

रिश्वतखोरी

भरे घड़ा पाप का 

डर काल से |

 

मारे उबाल 

भारत में अब भी 

व्यक्ति की जात |

 

वो जी रहे हैं 

शोषण सहकर 

भूख मारके |

 

कैसा विकास 

गरीब हाशिए पे 

गाँव निराश |

 

नोट खाकर 

श्रीमान् मालामाल 

जन बेहाल |

 

देश के नेता 

जहर उगलते 

राज करते |

 

चारों तरफ 

मचा है हाहाकार 

जन लाचार |

 

धुआँ निकला 

आज चूल्हा सुलगा 

रोटी गरीब |

 

ईमानदारी

अब कहीं न दिखे 

फले बेमानी |

- मुकेश कुमार ऋषि वर्मा 

ग्राम रिहावली, डाक तारौली गूजर, 

फतेहाबाद, आगरा, 283111

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