... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

यादों के गवाह

 

एक चारपाई 
पर पड़े बिस्तर को 
इस तरह सहेज कर रखा है किसी ने 
जैसे बना दिया हो
कमरे में ही स्मारक कोई |

बिछी चादर 
पर पड़ी सिलवटें
सुना रहीं थी दास्ताँ 

 


किसी गुजरी 
सुनहरी चांदनी रात की |

दो आँखें 
ऐसी कातर नज़रों से 
एकटक निहार रही हैं
तकिये पर लगी 
लार की कुछ बूंदों के निशान !

जैसे 
अमृत की बूंदे 
गिर गयी हों छलक कर 
रेत में
और प्यासा रह गया हो 
कोई नश्वर देवता...

 

© नितिन चौरसिया 

 

 

मेरा नाम नितिन चौरसिया है और मैं चित्रकूट जनपद जो कि उत्तर प्रदेश में है का निवासी हूँ ।

स्नातक स्तर की पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय से करने के उपरान्त उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय से प्रबंधन स्नातक हूँ । शिक्षणऔर लेखन में मेरी विशेष रूचि है । वर्तमान समय में लखनऊ विश्वविद्यालय में शोध छात्र के रूप में अध्ययनरत हूँ ।

 

फ़ोन -09453152897

ई-मेल - niks2011d@gmail.com

 

Share on Facebook
Share on Twitter
Please reload

Archive
Please reload

Search By Tags
Please reload

Follow Us
  • Facebook Basic Square
  • Twitter Basic Square
  • Google+ Basic Square