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चिड़िया (बाल कविता)

 

फुदक-फुदक कर नाचती चिड़िया, 

दाना चुंगकर उड़ जाती चिड़िया |

 

हरी-भरी सुंदर बगिया में, 

मीठे-मीठे गीत सुनाती चिड़िया |

 

अपने मिश्रीघुले बोलों से 

बच्चों का मन चहकाती चिड़िया |

 

नित मिल-जुल कर आती,

आपस में नहीं झगड़ती चिड़िया |

 

प्रेमभाव से रहना सिखलाती, 

बहुत बड़ी सीख देती नन्हीं चिड़िया |

 

तरह-तरह के रुप-रंग वाली, 

लाल, हरी, काली, नीली, पीली चिड़िया |

 

फुदक-फुदक कर नाचती चिड़िया, 

दाना चुंगकर उड़ जाती चिड़िया ||

 

- मुकेश कुमार ऋषि वर्मा 

ग्राम रिहावली, डाक तारौली, 

फतेहाबाद, आगरा, 283111

mukesh123idea@gmail.com

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