"कौन थी वो?" के लेखक श्री प्रवीण त्रिपाठी पैशन  से दो बातें

7 मार्च 2016

'हम न मरिहै, मरिहै संसारा' अर्थात मैं नहीं मरूँगा, मेरे भीतर का संसार मरेगा. संसार में हूँ, मुझमें संसार है, लेकिन मैं संसार नहीं हूँ. परिचय इन शब्दों से देते हैं, #‎माइक‬ नाम से लिखते हैं, पैशन उपनाम भी इस्तेमाल करते हैं, आखिर हैं कौन "कौन थी वो?” के लेखक, प्रवीण त्रिपाठी? आईये एक छोटे से इन्टरव्यू से कुछ जाने

1. आप दिल्ली 5 साल पहले आए, देवरिया, यू.पी. के रहने वाले हैं. आप जो हैं, अपने परिवार के अलावा, देवरिया के बनाए हुए हैं. कुछ बताएँगे उस जगह के बारे में, जिसने आपकी कला को निखारा, जिसे सुन कर सुनने वाला वहाँ घूमने जाने को मजबूर हो जाए.

2.आपकी कहानी में एक ऐक्सप्रैस ट्रेन की लय है, रामपुरी चाकू की धार है … नौजवान angst (उत्कण्ठा) का वो संगीन आभास भी है जो प्रगतिवाद और पिछड़ी सोचों के बीच अटके नौजवानों में व्यक्त होता है.

पहले भी दोनों तरह की सोचें थीं, मगर प्रगतिवाद लोग शायद बड़े शहरों में कुछ तबकों तक ही सीमित थे. शिक्षित खुद को अटका हुआ नहीं पाते थे... escape routes थे.

आपको क्या लगता है, कैसे निकल पाएगी आपकी जैनरेशन इस कठिन स्थिति से.

प्रवीण जी, हम आपकी कामयाबी की शुभकामनाएँ करते हैं. आशा करते हैं जल्द ही आपकी किताबें पढ़ने को मिलेंगीं. प्रवीण त्रिपाठी का ऑथर-पेज भी चैक करें - www.facebook.com/praveentripathipassion/
Above the Clouds
ई-मेल में सूचनाएं, पत्रिका व कहानी पाने के लिये सब्स्क्राइब करें (यह निःशुल्क है)