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🪶 गाँव से | नई प्रस्तुति
"खुटखुटिया बाबा की कथा" — देवी प्रसाद गौड़

"ब्रज में सेवा और साधना का अद्वितीय संगम"

"चेतना युक्त एक व्यक्ति ही स्वयं में चैतन्य सरोवर होता है..."
यह कथा किसी कल्पित संत की नहीं, बल्कि एक ऐसे सेवायत साधक की सजीव स्मृति है, जिन्होंने ब्रज की भूमि पर सेवा को ही साधना बना लिया। बंगाल से ब्रज आए खुटखुटिया बाबा की जीवन-गाथा न तो लीलाओं से भरी है, न ही किसी चमत्कार से ... यह उनके निस्वार्थ उपचार, मधुकरी, और संकीर्तन से जुड़ी उन क्षणों की गाथा है जो लेखक की स्मृति में अब भी गूंजती है।

बाबा की आँखों में गहराई थी, चाल में तेजी थी, और झोले में दवाइयाँ ... जिसे वे एक मरीज से मंगवाकर दूसरे को दे देते थे।

यह संस्मरण एक यथार्थ संत की याद है ... जो बीमारी के मौसम में डॉक्टरों को पछाड़ देते थे, और आधी रात को भी किसी द्वार पर खड़े हो सकते थे बस एक वाक्य लेकर:

"माँ, सुनी भैया को बुखार आई..."

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