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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता गुप्ता की कविता

  • कविता गुप्ता
  • 7 मार्च 2017
  • 1 मिनट पठन

नारी तुम हो कितनी महान , जग जननी का श्रृंगार तुम्हें l मिट्टी से जैसे सोना उपजे , धरती सा कहें धनवान तुम्हें l

सीना सपाट वसुधा सम है , विशाल ह्रदय, सागर जैसा l छूने से छुई मुई बन जाती , यह शौर्य, शक्ति जादू कैसा ?

न कभी, अरि तुम्हारा कोई हो , न + अरि किसी की तुम बनना l झुक जाना कर्तव्य की बेदी पर , पर अन्याय, पाप में मत झुकना l

तुम्हें सीमा में बाँध दिया नर ने , पर तुम असीम की पर्याय बनो l ईश्वर की अनमोल धरोहर कहते , सुह्रदय, विचारक, सर्वश्रेष्ठ बनो l

Kavita Gupta

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