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"हम प्यार में तो नहीं हैं?": सम्पादकीय प्राक्कथन

  • ई-कल्पना
  • 4 सित॰ 2017
  • 1 मिनट पठन

मुझे लगता था अनुभव का अभाव नौजवान लेखक को कहानियाँ कैसे सुझाएगा, लेकिन अचिंत पांडे की कहानी, “हम प्यार में तो नहीं हैं" पढ़कर आभास हुआ कि अच्छा लेखक जब कलम उठाता है तो एक क्लासिक की सम्भावना जगा ही डालता है. नौजवान जीवन में कभी मन की विकलता, कभी बेपरवाही, कभी हद दर्ज़े का आत्मविश्वास, कभी बेवजह कुंठा, बेबाक़ ढंग, अल्हड़पन … सब … ये सब और और अनगिनत उबलते भाव जो "चुलबुलाहट” ले आते हैं, वो अंचित की रचना में पढ़ने में आ रही है. बड़ी शोख़, आधुनिक और दिलचस्प गति है इनके लेखन में. वक्त के साथ आगे बढ़ने को उतारू भारतीय नौजवान की आवाज़ है इसमें. इस कहानी को ज़रूर पढ़ियेगा...

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