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ई-कल्पना कहानी कौन्टैस्ट परिणाम ...

ई-कल्पना कहानी कौन्टैस्ट के लिये 200 से अधिक कहानियाँ आईं. कहानियाँ शौर्टलिस्ट करने के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि किसी एक कहानी को सबसे बेहतरीन चुनना अनुचित होगा. संक्षिप्त सूची में 12 कहानियाँ चुनी गईं. उन्हें छोटे ग्रुपों में बांट कर, लेखकों के नाम-रहित तीन बाहरी एवं बेहद सम्मानीय सम्पादक/लेखकों द्वारा निर्णायित कराया गया.डॉ कविता वाचक्नवी (डायरैक्टर - संस्कृति), श्री अनुराग शर्मा (सम्पादक - सेतु पत्रिका) एवं श्री पंकज त्रिवेदी (सम्पादक - विश्वगाथा) के हम बहुत आभारी हैं.

 

बड़ी खुशी के साथ हम कौन्टैस्ट में चुनी हुई कहानियों के नाम प्रस्तुत कर रहे हैं. तीन कहानियाँ पहले स्थान पर हैं (रु. 3000 प्रति लेखक), तीन अन्य कहानियाँ दूसरे स्थान पर हैं (रु. 2000 प्रति लेखक). इसके अलावा 2 लघु कहानियाँ ई-कल्पना सम्पादक द्वारा सबसे बेहतरीन चुनी गईं (पुरस्कार रु. 1000 प्रति लेखक). सभी श्रेणीबद्ध कहानियाँ जुलाई, अगस्त और सितम्बर की ई-कल्पना पत्रिका “पाँच कहानियाँ” में प्रकाशित होंगी. इन्हें आप यहीं, ई-कल्पना की साईट पर पढ़ सकते हैं. यदि आपने हमारी मैगज़ीन को सबस्क्राइब किया है, तो समयानुकूल ई-मेल द्वारा आपको भेजी जाएंगी

शुभ कामनाओं सहित

 

सम्पादक, ई-कल्पना

 

प्रकाशन तिथि व श्रेणी अनुसार परिणाम सूची -

 

पाँच कहानियाँ – जुलाई अंक – निर्णायक - श्री अनुराग शर्मा

1. रोल नम्बर 9 – अजय ओझा (पुरस्कृत)

2. जूते की नोक पर – डॉ. रमाकांत शर्मा (पुरस्कृत)

3. बीस वर्ष बाद – मनमोहन भाटिया

 

पाँच कहानियाँ – अगस्त अंक – निर्णायक - श्री पंकज त्रिवेदी

1. सोई हुयी गली  - मनीष कुमार सिंह (पुरस्कृत)

2. बदलते रंग  - रश्मि शील (पुरस्कृत)

3. जिन्न की वापसी  - सौरभ वशिष्ठ

4. विष का प्याला  - प्रो. राजेश कुमार

 

पाँच कहानियाँ – सितम्बर अंक – निर्णायक - डॉ. कविता वाचक्नवी

  1. बासी पराँठा – सुधा गोयल नवीन (पुरस्कृत)

  2. अरुणा ताई – मिर्ज़ा हफीज़ बेग (पुरस्कृत)

  3. आखिर वह कौन थी – गोवर्धन यादव

  4. खोई हुई पहचान – देवी नागरानी

लघु कहानियों का श्रेणीकरण –

1, सुहाग की चूड़ी – मीरा जैन (पुरस्कृत) (जुलाई अंक में प्रकाशन)

1. भिखारी – धीरज कुमार श्रीवास्तव (पुरस्कृत) (अगस्त अंक में प्रकाशन)

2. आम के तोते (जुलाई अंक में प्रकाशन)

2. तांडव – तारकेश ओझा (सितम्बर अंक में प्रकाशन)

2. काबिल - इंदर भोले नाथ (सितम्बर अंक में प्रकाशन)

अगर आपका नाम ऊपर सूची में न हो तो हताश न हों. नई कहानियाँ लिखते रहें, भेजते रहें.

 

ई-कल्पना आधुनिक हिन्दी आवाज़ का माईक्रोफ़ोन है. हम उन कहानियों का इंतज़ार कर रहे हैं जिनका कथानक सुनियोजित हो, जिनकी भाषा में जादू हो,और आवाज़ में प्रबलता. इसके अलावा कथानक हमें आश्चर्य-चकित करे, या फिर मनोरंजन दे, ज़रूरी है.

ई-कल्पना का उद्देश्य ज़्यादा से ज़्यादा लोगों में कहानियाँ लिखने और पढ़ने की आदत को बढ़ाना है.

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