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"पांव ज़मीन पर निगाह आसमान पर" लेख संग्रह का भव्य लोकार्पण

 

वरिष्ठ लेखिका सविता चड्ढा के सद्य: प्रकाशित लेख संग्रह   "पांव ज़मीन पर निगाह आसमान पर"  का भव्य लोकार्पण पंजाब केसरी सभागार में पंजाब केसरी की चेयरपर्सन किरण चोपड़ा द्वारा किया गया।इस अवसर पर दिल्ली एवं दिल्ली से  दूर स्थानों से लेखक ,साहित्यकार शामिल हुए। इस अवसर पर अश्वनी कुमार, स्वामी, संपादक और श्रेष्ठ पत्रकार  पंजाब केसरी ने पधारकर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की ।  डॉ अशोक कुमार ज्योति ने मंच संचालन करते हुए, लेखिका एवम् मंचस्थ अतिथियों का परिचय दिया। उन्होंने लेख संग्रह के 16 लेखों पर संक्षेप में अपनी बात कही और इन्हें समाजोपयोगी स्वीकार किया।

 

कार्यक्रम के प्रारंभ में लेखिका सविता चडढा ने उपस्थित और मंचासीन अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि उनका लेखन सदैव सीमा और मर्यादा का लेखन रहा है। लेखन और सार्थक लेखन  में अंतर  बताते हुए  सविता चडढा ने कहा समुद्र में स्नान करने और गंगा में स्नान करने में जितना अंतर होता है उतना ही लेखन और सार्थक,/श्रेष्ठ लेखन में होता है। 1984 से शुरू अपने साहित्यिक सफर के बारे में लेखिका ने संक्षेप में बताया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रुप में डॉ घमंडीलाल अग्रवाल ने संग्रह को सरल,सरस और बोधगम्य भाषा शैली में लिखे लेख को प्रेरक, मार्गदर्शक व चरित्र निर्माण में सहायक बताया।

 इस अवसर सुरेन्द्र शर्मा जी द्वारा इस पुस्तक पर लिखी उनकी टिप्पणी का विशेष उल्लेख किया गया डॉ कल्पना पांडेय द्वारा। सुरेन्द्र शर्मा के अनुसार  स्वंतत्रता और स्वछंदता  के बीच के अंतर को मिटा देने पर टिके आंदोलनों केे शोर में विवेक की वह श्वास है जिससे समाज के समग्र विकास की बांसुरी में संगीत भरा जा सकता है।महत्वाकांक्षा की अंधी दौड़ में बेतहाशा भागी जा रही पीढ़ियों का हाथ पकड़ कर दो पल बतियानें का अभिनव प्रयास है यह पुस्तक।

 

इसी क्रम में कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे डॉ महेश दर्पण ने कहा इस संग्रह के लेख आदर्श बाल मानस  का निर्माण करने में जहां सक्षम है वहीं बेटियों को विनम्रता  से  व्यवहार कुशल होकर आगे बड़ने  की दिशा में अग्रसर करनेवाले हैं। उन्होंने कहा इस पुस्तक को पढ़ते हुए  उन्हें कई बड़ी  किताबों की याद दिलाई।

आज के आयजन के मुख्य अतिथि डॉ हरीश नवल ने संग्रह के लेखों को उद्देश्यपूर्ण और सार्थक कहा। उन्होंने ये भी कहा कि जीवन के टेड़े मेड़े रास्ते पर चलना सिखाते हैं ये लेख और जीवन की दशा और दिशा बदल सकते हैं। उन्होंने कहा सविता चडढा की ये पुस्तक स्वेट मार्टन  पुस्तकों  से कम नहीं हैं।

 

 डॉ कमल किशोर गोयनका ने  कहा  सविता चडढा की यह पुस्तक नया स्त्री विमर्श है।उन्होंने  इस संग्रह के एक विशेष  लेख का उल्लेख किया, जिसमें बेटी को ये समझाया गया है कि दूसरे घर, अर्थात ससुराल में जाकर उस घर को बदनाम न करना। 

श्रीमती किरण चोपड़ा ने इस संग्रह के सभी लेखों को सार्थक और समाजोपयोग  बताया। उन्होंने कहा कि सविता चडढा के इस लेख संग्रह के लेख हम किश्तवार पंजाब केसरी में  दिया करेंगे।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ विनोद बब्बर ने "पांव जमीन पर निगाह आसमान पर" संग्रह के 16 लेखों को  जीवन के सोलह शिंगार  बताया और इन लेखों को आंतरिक सुंदरता में वृद्धि में सहायक स्वीकार किया। इस अवसर पर गजेंद्र सोलंकी और जय सिंह आर्य ने बेटियों  पर अपने कवितायेँ सुनाई  भरपूर  सराहना हुई। कार्यक्रम का संचालन डॉ अशोक कुमार ज्योति ने किया। आज समारोह में  उपरोक्त मंचस्थ साहित्यकारों के साथ साथ  समारोह में डॉ महेश चंद शर्मा, चमन लाल शर्मा, रमेश वधवा,ओम प्रकाश  सपरा,  डॉ शन्नो श्रीवास्तव, डॉ स्नेह सुधा नवल,  निहाल चंद शिवहरे, सत्यदेव तिवारी, कुलदीप सलिल, डॉ जय सिंह आर्य, गजेन्द्र सोलंकी, राम गोपाल शर्मा, एम के चड्ढा,ओम प्रकाश प्रजापति, हरीश चोपड़ा, परविन्द्र शारदा, राधिका मल्हौत्रा , डॉ ज्योति वर्धन साहनी, जगदीश मित्तल, विमला कौशिक, रसिक गुप्ता, पवन कुमार परमार्थी, डॉ रविंद्र कुमार, डॉ बसंत चड्ढा, मंजू शाक्य, सुरेश खांडवेकर,  गोविंद पंवार, आमोद कुमार, राजेन्दर  नटखट, डॉ दुर्गा सिंह उदार ,  वीणा अग्रवाल,  चंद्रकांत मलिक, यति  शर्मा, चंद्रमणि  चौधरी, डॉ नीरजा चौधरी, शारदा मादरा ,चरणजीत सिंह, दीपाली चड्ढा, कमलेश खन्ना,  सुमित्रा गोयल, विनोद कुमार खन्ना, सुषमा प्रकाश, शुचिता चडढा, अभिराज, पूनम शर्मा, सूरज प्रकाश और सुभाष चडढा  के साथ प्रकाशक धर्मेन्द्र ने लेखिका को शुभकामनाएं दी।

 

 

 

 

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