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वो शाम

  • अनुज चतुर्वेदी
  • 22 जुल॰ 2020
  • 2 मिनट पठन

अपडेट करने की तारीख: 12 सित॰ 2020


वो सुरमई शाम थी। सूरज अस्ताचल की ओर जा रहा था और पंछी अपने घौंसलों की ओर लौट रहे थे। रोहन अपने आफिस से निकला और घर जाने के लिए टैक्सी स्टैंड की तरफ बढ़ा।

रास्ता चलते हुए उसे एक व्यक्ति दिखाई दिया जिसका बुझा हुआ चेहरा, बढ़ी हुई दाढ़ी तथा उलझे हुए बालों को देख कर वह कोई भिखारी लग रहा था। रोहन को उसका चेहरा अपने पिता से मिलता जुलता लगा।

चार साल पहले उसके पिता जी अचानक घर से गायब हो गए थे। बहुत खोजबीन के बाद भी उनका कहीं कोई पता नहीं लगा।उस दिन से आज तक रोहन अपने पिता का चेहरा आंखों में लिए उन्हें दर दर खोज रहा था।

वो उस भिखारी जैसे व्यक्ति की ओर बढ़ा। उसे लगा कि शायद वह उसके पापा हैं किंतु भिखारी ने उससे नजरें चुराने की कोशिश की। रोहन उस व्यक्ति की ओर बढ़ रहा था कि अचानक तेज गति से आते स्कूटर ने उसे धक्का दिया। वह गिरने ही वाला था कि भिखारी ने उसे थाम लिया। रोहन को बचपन के वो दिन याद आ गये जब वह गिरने को होता, तो पापा उसे थाम लिया करते थे।

वह अपने पिता को पहचान चुका था। उसने उनके चरणों को छूकर पूछा-" पापा! अब तक कहां थे आप? यह क्या हो गया है आपको?"

उन्होंने बताया-" बेटा! एक दिन जब तुम और तुम्हारी मां घर नहीं थे ,कंजूमल ने अपने चार साथियों के साथ मेरा अपहरण कर लिया था। चार साल तक उसने मेरे ऊपर बहुत अत्याचार किए। तीन दिन पहले जब मैं मरणासन्न हो गया तो वो मुझे नाले के किनारे फेंक कर चले गए। एक किसान ने जब मुझे उस हालत में देखा तो वह मुझे अपने घर ले गया और मेरा उपचार और सेवा कर मुझे ठीक किया। आज़ मैं उसे धन्यवाद देकर अपने घर के लिए निकला । ..... लेकिन मैं डर गया कि चार साल बाद तुम लोग मुझे पहचानोगे या नहीं।"

रोहन ने कहा-" पापा! आपने अपने जीवन की हर खुशी हम पर न्योछावर कर दी। मुझे पाल पोस कर बड़ा किया, फिर कैसे संभव है कि मैं आपको नहीं पहचान पाता।....... पर पापा! कंजूमल ने ऐसा क्यों किया? "पापा ने उत्तर दिया-" कंजूमल मानव तस्कर है बेटा! वह बच्चों को अगवा कर बेचा करता था, मैंने उसके अपराध और ठिकाने की सूचना पुलिस को दी थी, जिसके कारण उसे चार साल की कैद हुई थी। इसका बदला लेने के लिए उसने मुझे चार साल कैद करके रखा।"

रोहन ने कहा-" अब आप निश्चिंत हो जाइए पापा! अब आपका बेटा आपके साथ है, कंजूमल को उसके गुनाह की सज़ा अवश्य मिलेगी।"

रोहन की बात सुनकर उनकी आंखों में चमक आ गई और उन्होंने उसे सीने से लगा लिया।

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नाम-अनुज चतुर्वेदी 'अनुभव'

माता- श्रीमती पूनम चतुर्वेदी

पिता- आचार्य नीरज शास्त्री

जन्म तिथि- 17/03/2007

शिक्षा-कक्षा आठ में अध्ययनरत

प्रकाशित कृति- 'ऊंच नींच का फाफड़ा'( बाल कविता संग्रह)

बाल सदस्य- तुलसी साहित्य संस्कृति अकादमी, मथुरा

पुरस्कार/ सम्मान-

1- डॉ रमन दास पंड्या स्मृति साहित्य पुरस्कार-2015

2- स्वरचित काव्य पाठ पुरस्कार ( उ०प्र० सरकार)

3- रामायण प्रतियोगिता पुरस्कार- सांस्कृतिक प्रज्ञा संस्थान, बीकानेर

4-शहीद कैप्टन राकेश गायन प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार

पता- 34/2, लाजपत नगर, एन. एच-2,मथुरा281004(उ०प्र०)

संपर्क सूत्र- 9259146669

मेल- anujchaturvedianubhav8888@gmail.com

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