July 11, 2020

गनपत कई दिनों से पीछे पड़ा था, गुरुदेव हमको भी कुछ व्यंग्य–संग लिखना-पढ़ना सिखला दो| हम जो लिख के लाते हैं, आप उस पर नजर भी नहीं मारते?

मैंने कहा गनपत, व्यंग्य लिखना बहुत आसान है, इसमें बस ‘आत्म-चिंतन’ की जरूरत होती है, जो सामान्य दिखता है उसके उलट क्या हैं? परदे के पीछे का रहस्य क्या है? ये समझ लो, एक...

प्रज्ञा भी थाली चम्मच बजाने अपने अपार्टमेंट की गैलरी में पहुंच गई। पांच बजते ही विभिन्न ध्वनियां गूंजने लगीं। उनके सामने रहने वाले मिश्रा जी शंख फूंक रहे थे। प्रज्ञा देख रही थी, ऐसा कोई घर, बाल्कनी और पोर्च नहीं था, जहां रसोई के बर्तन वाद्य-यंत्र की भांति न बजाए जा रहे हों? जब बीस मिनट पूरे हुए तो ट...

मिस्टर रमन अग्रवाल लगभग तीन वर्ष बाद अपनी कम्प्यूटर लैब से बाहर आया। सारी रात वह सोया भी नहीं था। फिर भी उसका चेहरा एक अभूतपूर्व सफलता से दैदिप्यमान हो रहा था। उनके पांव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। तीन वर्षों से वे अपनी खोज में इस प्रकार डूबे थे कि घरवाले उसे सनकी समझने लगे और बाहर के लोग पागल। उनकी बढ़ी...

कभी कभी मन में आता है कि, शांति से पूछूं तुमसे हे भगवान,

हम तो चला रहे थे ज़िन्दगी, कर के बस जैसे तैसे काम,

कुछ गलती हो गई क्या हमसे, कि तुम तो रूठ ही गए भगवान,

बता दीजिये सीधे से कि चाहिए क्या तुमको भगवान..

कहीं कोरोना का क़हर, कहीं अम्फन का त्राहिमाम,

एक तरफ टिड्डो से बचें, तो एक तरफ भवंडर निसर्ग महान,

एक...

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