... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

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पुस्तक :  स्वर्णपात्र ( वैदिक कविताएँ)
रचनाकार: डॉ.मुरलीधर चांदनीवाला,
               'मधुपर्क' ७ प्रियदर्शिनी नगर,रतलाम ४५७००१
               संपर्क: (०७४१२)२६३१४२, मोबाइल: ९४२४८६६४६०...

विधा की रातों की नींद मानों उससे आईस्पाई खेल रही थी.कभी वह उठ कर बालकनी में टहलने लगती कभी बोतल से पानी पीती और कभी लेट कर जबरदस्ती आंखे बन्द कर सोने का प्रयास करती.पर नींद भी कम चतुर न थी उसके हाथ न आती.

तीसरी बार जब वह बिस्तर से उठी तो राजुल ने कहा ‘‘ सो जाओ यार क्यों दिमाग खराब कर रही हो ’’

विधा कै...

माना कि बहुत सुन्दर हो, अद्भुत और आकर्षक भी,

मेरे भावों के उद्वेग को झेलना आता है तुम्हें।

कभी प्रतिकार नहीं बल्कि हमेशा दिया साथ ही,

तुम में भरी है रंगीनियत,नीलाभ सा अंतर्मन।

कोई जितना चाहे रंग बिखेरे, तुम्हारा है खुला निमंत्रण।

मेरे मन के भाव बखूबी बयां होते तुमसे,

कोई कितनी भी कोशिश कर ले,

तुम पर है मे...

अपनी पीठ वो जब भी दीवार से टिकाकर खड़ी होती थी, उसके दाएं पैर का घुटना भी मुड़ जाता था, इस तरह वो एक पैर मोड़कर दीवार के सहारे एक पैर पर खड़ी होती थी। उस दिन भी जब आराध्या की पीठ दीवार की ओर गयी, उसका एक पैर खुद ब खुद मुड़कर दीवार की ओर जा ही रहा था कि अचानक वो पीठ दीवार से हटाकर बिल्कुल चैतन्य सी अवस्था...

कमला बड़ी देर तक कमरे में निढाल पड़ी रही फिर उसे न जाने क्या सूझी कि वो उठकर बाहर चली आयी। उसने दुर्गेश से कहा ‘‘मुझे छत पर ले चलो दुर्गेश’’।

दुर्गेश ने हैरानी से कहा ‘‘अभी टाइम है धूप ढलने में’’।

कमला ने दांत पीसते हुए सख्ती से कहा ‘‘ले चलता है कि चाहता है कि मैं गिर पड़ जाऊँ’’।

दुर्गेश ने भी सख्ती से कह...

  सुबह आंख खोलने से मेरा सफर शुरू हो जाता है। दिन भर हजारों चित्रों को देखती रहती मेरी आंखें। असंख्य ध्वनियां टकराती रहती मेरे कानों से। पांव चलते रहते हैं। हाथ कुछ करते रहते हैं। उठ जाता हूं तो चल देता हूं, थक जाता हूं तो सो जाता हूं। आंख खोलता हूं प्रकाश दिखता है, बंद करता हूं तो अंधकार में सैकड़ो...

कमला ने कुढ़ते हुए कपड़े उठाए और चार कोठी छोड़ कर गली के नुक्कड़ में एक पेड़ के नीचे इस्त्री करती धोबन कोयल की मेज पर पटक दिए।

"लाडो बड़ी गर्म लग रही है, क्या हुआ?"

"आराम से इस्त्री कर तब तक जरा पान चबा लूं।"

कोयल की मेज पर एफएम रेडियो में गाना बजा "सजनवा बैरी हो गए हमार" गाना सुनते ही कमला झूम उठी "गाना सुन...

बहुत दिनों से नौवीं की छात्रा कलिका, स्टाफ- रूम में चर्चा का विषय बनी हुई है. शिक्षिकाएं एकमत हैं कि उसे कोई मानसिक समस्या जरूर है. सबको श्रीमती मीरा वर्मा का इंतजार है, जो अपने ढीली सेहत के चलते, लम्बी छुट्टी पर थीं और वापस स्कूल ज्वाइन करने वाली हैं. आठवीं में वे ही कलिका की कक्षाध्यापिका रहीं और...

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1. ई-कल्पना जनवरी 2020 कहानी प्रतियोगिता के परिणाम घोषित हो चुके हैं.
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