... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

2017 में प्रकाशित डॉ. हंसा दीप का उपन्यास ‘बंद मुट्ठी’ बदलते समय में रिश्तों के नए समीकरण की बात करता है।  भूमंडलीकरण की बात पुरानी है, तब की, जब तान्या के पापा पूरा विश्व घूमें थे और फिर सिंगापुर को स्थायी निवास बना लिया था, जब लुधियाना, पंजाब के खन्ना अंकल कतर में रहते थे। ‘बंद मुट्ठी’ में सिंगापु...

October 26, 2019

रोशन करो तुम इस जग को इतना 

कोई दर तिमिर से ढका रह न पाए 

 दीपों की माला सजे द्वार सबके  

 अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए 

स्नेह से पूरित हो जीवन की बाती 

द्वेषों की आँधी बुझाने न पाए 

सुरीली हो सरगम सुप्रीत इतनी 

वितृष्णा के स्वर इसमें मिलने न पाएं 

निर्मल हो यह मन नदिया के जैसे 

सागर सा ख़ारा यह...

जगमग रोशन हो हर घर

मिले नव आशा 

खील-बतासा 

दीपोत्सव का त्यौहार 

पावनपर्व दीपावली |

फसलों से महका है परिवेश 

कृषक भाग्य जगे 

नई उमंग, नई तरंग 

थोड़े से पटाखे 

बस थोड़ी सी आतिशबाजी 

दीपोत्सव का त्यौहार 

पावनपर्व दीपावली |

प्यार-स्नेह से मिलो गले 

बहे मंद-मंद शीतल समीर 

करो नव सृजन देती यही संदेश 

नूतन संकल्प लेकर मन...

भरोसे का आदमी ढूढते मुझे साढ़े सन्तावन साल गुजर गए|कोई मिलता नहीं | मार्निग वाक् वालो से मैंने चर्चा की वे कहने लगे यादव जी....  'लगे रहो'.... | उनके 'लगे-रहो' में मुझे मुन्ना-भाई का स्वाद आने लगा | मैंने सोचा गनपत हमेशा कटाक्ष में बोलता है | उसकी बातों के तह में किसी पहेली की तरह घुसना पड़ता है |
...

वरिष्ठ लेखिका सविता चड्ढा के सद्य: प्रकाशित लेख संग्रह   "पांव ज़मीन पर निगाह आसमान पर"  का भव्य लोकार्पण पंजाब केसरी सभागार में पंजाब केसरी की चेयरपर्सन किरण चोपड़ा द्वारा किया गया।इस अवसर पर दिल्ली एवं दिल्ली से  दूर स्थानों से लेखक ,साहित्यकार शामिल हुए। इस अवसर पर अश्वनी कुमार, स्वामी, संपादक और...

1. सूरज चमको न!

सूरज चमको न

अँधकार भरे दिलों में

चमको न सूरज

उदासी भरे बिलों में

सूरज चमको न

डबडबाई आँखों पर

चमको न सूरज

गीली पाँखों पर

सूरज चमको न

बीमार शहर पर

चमको न सूरज

आर्द्र पहर पर

सूरज चमको न

अफ़ग़ानिस्तान की अंतहीन रात पर

चमको न सूरज

बुझे सीरिया और ईराक़ पर

जगमगाते पल के लिए

अरुणाई भरे कल के लिए

सूरज चमको न

आज

2...

अरुणा ताई, यह नाम आज शहर में किसी परिचय का मोहताज नहीं था। वह आज इतनी बड़ी राजनैतिक दल की फायरब्रांड लीडर कहलाती थी। वैसे उन्हे फायरमाऊथ कहना ज़्यादा उचित लगता। ज़ाहिर है उनकी ज़बान आग उगलती थी। और यही आग बढ़कर लोगों के दिलों में पहुंचती। और लोग इससे चार्ज हो जाते। नौजवान इनसे खास प्रभावित रहा करते। लेकि...



नशा नाश का जड़ है प्यारे , इसको मत अपनाओ ।
स्वस्थ अगर रहना चाहो तो , सादा भोजन खाओ ।।

इज्जत पैसा दोनों होते , एक साथ बर्बादी ।
रोज लड़ाई झगड़ा होते , बनो नहीं तुम आदी ।।

टूटे घर परिवार सभी से , रिश्ते नाते छोड़े ।
ऐसी आदत वालो से अब , काहे रिश्ता जोड़े ।।

खाने को लाले पड़ जाते , बच्चे भूखे सोते  ।
ज...

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